धातु – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

आज हम इस लेख में जानेंगे की धातु किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। धातु का सामान्य भाषा में बात करे तो इसका अर्थ ‘‘ किसी भी क्रिया के मूल रूप को धातु कहा जाता है। ’’    

हमारे पढने व लिखने के अनुसार तो धातु एक ही होते है लेकिन व्याकरण के अनुसार पदार्थ को कई अनेक भागों में बांटा गया है। इसलिए हमें धातु क्या है इसे समझना चाहिए। आज का हमारा यह लेख आपको इस के बारे में अच्छे से समझायेगा की धातु क्या है एवं इसके कितने प्रकार होते है। 

धातु क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस लेख में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। हम उम्मीद करते है की आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा। जब हम बचपन में स्कूल में पढते थे तब से ही व्याकरण के बारे में पढते आ रहे है। 

इसके बावजूद भी ऐसे कई बिंदु है जो हमें धातु व व्याकरण के संदर्भ में समझ नही आते है। हमारे इसी लेख में उन्ही बिन्दुओं को समझाने का प्रयास कर रहे है। चलिये जानते है की धातु क्या है और इसके कितने प्रकार है –

धातु की परिभाषा

हिन्दी व्याकरण में क्रिया के मुख्य रूप को धातु कहा जाता है। दूसरे शब्दों में बात करे तो क्रिया में सभी अंशों के रूप में पाया जाता है। जिस मूल शब्दों से क्रिया बनती है उसे धातु कहते है। उदाहरण मे देखे तो ‘‘ पढ़ना एक क्रिया है इसमें ना एक प्रत्यय है वही पढ इसमें धातु है। 

धातु के भेद 

हिंदी व्याकरण में धातु को 5 भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है – 

मूल धातु 

इस धातु की श्रेणी में उन धातुओं को रखा जाता है जिनमें पहला धातु स्वतंत्र होता है, यह किसी दूसरे धातु पर आश्रित नही होते है जैसे खा, देख, पी इत्यादि। 

यौगिक धातु

ऐसे धातु जो किसी प्रत्यय से बनते है, वे धातु यौगिक धातु की श्रेणी में आते है। उदाहरण के तौर पर देखे तो ‘‘ खाना से खिला ’’ और पढ़ना से पढा ’’ बना। यौगिक धातु तीन प्रकार से बनते है – 

  • धातु में प्रत्यय लगाने से अकर्मक से सकर्मक और प्रेरणार्थक प्रकार की धातु बनती है। 
  • कई धातुओं को मिलाकर एक अन्य संयुक्त रूप से संयुक्त धातु बनती है। 
  • व्याकरण में संज्ञा या विशेषण से नामधातु बनती है।

नाम धातु 

हिंदी व्याकरण में ऐसी धातु जो संज्ञा व विशेषण से बनते हो, नामधातु में आते है। इस प्रकार के धातु के उदाहरण निम्न है – 

  1. संज्ञा से- हाथ – हथियाना।
  2. संज्ञा से- बात – बतियाना।
  3. विशेषण से- चिकना – चिकनाना।
  4. विशेषण से- गरम – गरमाना।

मिश्र धातु 

ऐसी क्रिया जिसमें संज्ञा, विशेषण और क्रिया विशेषण शब्दों के बाद करना या होना जैसे शब्दों की क्रिया का प्रयोग होता है, इससे बनने वाली नयी धातुओं को मिश्रित धातु कहा जाता है। 

उदाहरण के तौर पर समझे तो, कुछ इस प्रकार के उदाहरण सामने आते है – 

  1. होना या करना- काम करना, काम होना।
  2. देना- पैसा देना, उधार देना।
  3. मारना- गोता मारना, डींग मारना।
  4. लेना- काम लेना, खा लेना।
  5. जाना- चले जाना, सो जाना।
  6. आना- किसी का याद आना, नजर आना।

अनुकरणात्मक धातु

ऐसे धातु जो किसी ध्वनि के अनुकरण पर बनाई जाते है, उसे अनुकरणात्मक धातु कहा जाता है। 

जैसे- पटकना, टनटनाना, खटकना धातु अनुकरणात्मक धातु के अंतर्गत आती है।

इन सब के अलावा धातु का एक अन्य प्रकार प्रेरणार्थक धातु भी कहलाता है जिसे पुनः दो भागों में बांटा गया है – 

  • प्रथम प्रेरणार्थक धातु – ऐसे धातु जिसमें कर्ता स्वयं कार्य करने दूसरों को उस कार्य को करने की प्रेरणा देते है, हिंदी में उसे प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया या धातु कहा जाता है। उदाहरण – अध्यापिका बच्चों को पढ़ाती है। इस उदाहरण में अध्यापक स्वयं भी पढ रही है और दूसरों को भी पढने की सलाह दे रही है। 
  • द्वितीय प्रेरणार्थक धातु – ऐसे धातु जिसमें कर्ता स्वयं शामिल न होकर दूसरों को उस कार्य को करने की प्रेरणा देते है, हिंदी में उसे द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया या धातु कहा जाता है। उदाहरण – माताजी बच्चों से राखी बनवाती है। 

निष्कर्ष

यहाँ हमने धातु क्या है एवं उसके सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। अगर शब्द से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारा यह मेहनत भरा लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करेंगे।

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