पद – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

आज हम इस लेख में जानेंगे की पद किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। पद का सामान्य भाषा में बात करे तो इसका अर्थ ‘‘ जब कोई सार्थक शब्द वाक्य मेँ प्रयुक्त होता है तब उसे श्पदश् कहते हैँ। व्याकरण के नियमों के अनुसार विभक्ति, वचन, लिंग, काल आदि की योग्यता रखने वाला वर्णों का समूह “ पद ” कहलाता है। जैसे – दामोदर स्कूल जाएगा। यह वाक्य ‘‘ दामोदर ’’, ‘‘स्कूल’’ और ‘‘जायेगा’’ तीन पदों से बना है। ’’

हमारे पढने व लिखने के अनुसार तो पद एक ही होते है लेकिन व्याकरण के अनुसार पद को कई अनेक भागों में बांटा गया है। इसलिए हमें पद क्या है इसे समझना चाहिए। आज का हमारा यह लेख आपको इस के बारे में अच्छे से समझायेगा की पद क्या है एवं इसके कितने प्रकार होते है। 

पद क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस लेख में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। हम उम्मीद करते है की आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा। बचपन में हम स्कूल के समय से ही व्याकरण के बारे में पढते आ रहे है।  

इसके बावजूद भी ऐसे कई बिंदु है जो हमें पद व व्याकरण के संदर्भ में समझ नही आते है। हमारे इसी लेख में उन्ही बिन्दुओं को समझाने का प्रयास कर रहे है। चलिये जानते है की पद क्या है और इसके कितने प्रकार है –

पद की परिभाषा 

हिंदी व्याकरण में सार्थक वर्ण और वर्णो के ग्रुप या समूह को ‘‘ शब्द ’’ कहा जाता है। हिंदी में शब्द प्रकार से साभिप्राय होता है। किसी भी वाक्य में जब सार्थक शब्द को प्रयुक्त किया जाता है तो उसे पद कहा जाता है। हिंदी व्याकरण के नियमों से समझे तो हिंदी में विभक्ति, वचन, काल, लिंग इत्यादि सभी समान योग्य रखने वाले वर्णो के ग्रुप या समूह को ‘‘ पद ’’ कहा जाता है। उदाहरण से समझे तो एक वाक्य ‘‘ श्याम मंदिर जाएगा ’’ इस वाक्य में श्याम, मंदिर और जाएगा तीनों एक पद है। 

पद के भेद

हिंदी  व्याकरण में पद के 5 भेद बताये गये है। इन पांच भेदों के बारे आप यहां जान सकते है। 

संज्ञा

संज्ञा का शाब्दिक अर्थ ऐसे शब्द से होता है जिसमें सही का बोध होता है, संज्ञा कहलाता है। यानी वे शब्द जो संस्थान, वस्तु, प्राणी, गुण, व्यक्ति इत्यादि का बोध कराते हो संज्ञा कहलाते है। संज्ञा के उदाहरण देखे तो इसमें दिल्ली, नगर, किताब, मेज इत्यादि संज्ञा के अच्छे उदाहरण है। हिंदी व्याकरण में संज्ञा को मुख्यतः 3 भागों में बांटा जाता है, वे तीन भाग इस प्रकार है – 

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा – इस श्रेणी में इस प्रकार की संज्ञा को शामिल किया जाता है जिसमें किसी व्यक्ति का बोध होता हो। इस संज्ञा के उदाहरण जैसे राम, श्याम, गंगा इत्यादि। 
  • जातिवाचक संज्ञा – इस श्रेणी में इस प्रकार की संज्ञा को शामिल किया जाता है जिसमें किसी जाति, वर्ग या समुदाय का बोध होता हो। इस संज्ञा के उदाहरण जैसे मनुष्य, घोडा, स्कूल, फूल इत्यादि।
  • भाववाचक संज्ञा – इस श्रेणी में इस प्रकार की संज्ञा को शामिल किया जाता है जिसमें किसी गुण, दोष, भाव, दशा इत्यादि का बोध होता हो। इस संज्ञा के उदाहरण मीठा, सुन्दर, बचपन इत्यादि।

सर्वनाम

वे शब्द जिनका उपयोग संज्ञा के स्थान पर होता हो, सर्वनाम कहलाता है। सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ होता है सबका नाम, ऐसे शब्द जो सबके नाम पर आते हो, सर्वनाम की श्रेणी में आते है। ऐसे शब्दों के उदाहरण तुम, आप, यह, वह, हम, आपका इत्यादि। ऐसे वाक्य जिनमे संज्ञा की पुनरुक्ति हो रही हों उसे रोकने के लिए सर्वनाम का प्रयोग होता है। 

सर्वनाम का उदाहरण – “ श्याम कल स्कूल आयेगा ”। उनके आते की काम की तैयारी कर लेंगे। इस वाक्य में राम के स्थान पर उनके का प्रयोग किया है, यह सर्वनाम को परिभाषित करता है। 

सर्वनाम को 6 भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है – 

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम 
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम 
  3. अनिश्चयवाक सर्वनाम 
  4. संबंधवाचक सर्वनाम 
  5. प्रश्नवाचक सर्वनाम 
  6. निजवाचक सर्वनाम 

विशेषण

ऐसे शब्द जो संज्ञा व सर्वनाम के स्थान पर उनकी गुणवत्ता बताते हो उन शब्दों को विशेषण की श्रेणी में रखा जाता है। मोटा, पतला, कौन इत्यादि विशेषण के अच्छे उदाहरण है।

विशेषण को मुख्यतः 4 भागों में बांटा जा सकता है –  

  1. गुणवाचक विशेषण – संज्ञा व सर्वनाम के स्थान पर किसी विशेष प्रकार के गुण के बोध कराने के लिए इस विशेषण का प्रयोग किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति मोटा है तो इस वाक्य के उच्चारण में मोटे के गुण को बोध होगा, जैसे करीना काफी मोटी है, करिश्मा काफी पतली है, आम मीठे है।
  2. परिमाणवाचक विशेषण – ऐसे संज्ञा व सर्वनाम जिनके स्थान पर किसी माप-तौल या इकाई का बोध होता हो उसे परिमाणवाचक विशेषण की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे मै रोजाना एक किलो सेब खाता हूॅं।
  3. संख्यावाचक परिणाम – ऐसे संज्ञा जिनमें किसी संख्या का बोध होता है जैसे मेरे घर में पांच सदस्य है। 
  4. सार्वनामिक विशेषण – ऐसे सर्वनाम जो किसी संज्ञा की और चिन्हित करते हो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते है जैसे वह आदमी घर जा रहा है। 

क्रिया

किसी भी वाक्य में किसी भी काम को करने को या किसी काम के होने का बोध होता है उसे क्रिया कहते है। जैसे श्याम घूमता है। इस वाक्य में घूमता एक किया है। क्रिया के मुख्यतः 2 भाग होते है – 

  1. सर्कमक क्रिया – ऐसी क्रिया जिसमे व्यापार (कार्य) का फल कर्त्ता को छोड़कर विशेष रूप से कर्म पर पड़ता है, वह सकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे- मोहन ने खाना खाया। 
  2. द्विकर्मक क्रिया – ऐसे वाक्य जिसमें क्रिया का प्रभाव कर्ता पर पड़ता है, द्विकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे कुता भौकता है। 

अव्यव

ऐसे शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन, क्रिया, कारक आदि के कारण कोई भी विकार उत्पन्न नहीं होता है, उन्हें अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- अन्दर, बाहर, अनुसार, अधीन, इसलिए, यद्यपि, तथापि, परन्तु इत्यादि अव्यय के उदाहरण है। 

निष्कर्ष

यहाँ हमने अव्यव क्या है एवं उसके सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। अगर शब्द से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारा यह मेहनत भरा लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करेंगे।

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