प्राकृतिक संख्या, परिभाषा एवं गुणधर्म

आज हम इस लेख में जानेंगे की प्राकृतिक संख्या किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। प्राकृतिक संख्या का सामान्य भाषा में बात करे तो इसका अर्थ ‘‘ इन संख्याओं को मतलब ऐसी संख्याओं से है जिनका उपयोग गिनती करने के लिए काम में आता है। ’’ 

हमारे पढने व लिखने के अनुसार तो प्राकृतिक संख्या एक ही होती है लेकिन गणित के अनुसार प्राकृतिक संख्या को कई अनेक भागों में बांटा गया है। इसलिए हमें प्राकृतिक संख्या क्या है इसे समझना चाहिए। आज का हमारा यह लेख आपको इस के बारे में अच्छे से समझायेगा की प्राकृतिक संख्या क्या है एवं इसके कितने प्रकार होते है। 

प्राकृतिक संख्या क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस लेख में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। हम उम्मीद करते है की आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा। जब हम बचपन में स्कूल में पढते थे तब से ही गणित के बारे में पढते आ रहे है। 

इसके बावजूद भी ऐसे कई बिंदु है जो हमें प्राकृतिक संख्या व गणित के संदर्भ में समझ नही आते है। हमारे इसी लेख में उन्ही बिन्दुओं को समझाने का प्रयास कर रहे है। चलिये जानते है की प्राकृतिक संख्या क्या है और इसके कितने प्रकार है –

प्राकृतिक संख्या की परिभाषा

ऐसी संख्या जिससे किसी वस्तु से गणना की जाए, ऐसी संख्या को प्राकृतिक संख्या जाता है। प्राकृतिक संख्या धनात्मक संख्या होती जो ज्यादा की और बढ़ती जाती है। गणित में ऐसी संख्या की प्रकृति धनात्मक होती है इसमें शून्य को शामिल नहीं किया जाता है।

गणित में संख्याओं के प्रकार 

गणित विषय में भी संख्याओं के कई अलग – अलग भाग होते है – 

प्रकृति या प्राकृत संख्याएं

गणित की वे संख्या जो 1 से अनंत तक हो, ऐसी संख्याएँ प्राकृतिक संख्याओं में आती है। जैसे 1 , 2 , 3 , 4 , 5 …….. इत्यादि। यह सारी संख्याएं गणित में अनंत तक होती है। 

पूर्ण संख्याएं 

गणित की वे संख्या जो 0 से शुरू होती है और अनंत तक जाती है, ऐसी संख्याओं को पूर्ण संख्याएँ कहा जाता है। जैसे 0 , 1 , 2 , 3 , 4 , 5 …………. इत्यादि। 

पूर्णांक संख्याएं

आपने गणित में कुछ ऋणात्मक संख्याओं को भी देखा होगा, उन संख्याओं को गणित में पूर्णांक संख्याओं की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे -5, -4, -3, -2, -1, 1 , 2 , 3 , 4 , 5 इत्यादि। 

परिमेय संख्या 

गणित की वे संख्या जिन्हें a / b की फाॅर्म में लिखा जाता है। इस में a & b दोनो धनात्मक व पूर्ण संख्याएं होती है। जैसे 1/2, 4/5 इत्यादि। 

अपरिमेय संख्या 

गणित की वे संख्याएं जिन्हें 1/ 2 के फॉर्म में लिखा जाता है, अपरिमेय संख्या कहलाती है। जैसे √2 , √5 , √15 . . . . 

सम संख्याएं 

गणित की वे संख्या जो पूर्णतया विभाजित होती है या सामान्य भाषा में कहे तो किसी भी संख्या को विभाजित करने के बाद उन संख्याओं का मान सम के रूप में आता है, सम संख्या कहलाती है। जैसे 2 , 4 , 6 , 8 , 10 इत्यादि। 

विषम संख्याएं 

गणित की वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णत्या विभाजित नहीं होती है, ऐसी संख्याओं को विषम संख्या की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे 1, 3, 5, 7, 9, 11 इत्यादि। 

अभाज्य संख्या 

गणित भाषा की वह संख्या केवल 1 या स्वयं की संख्या से ही विभाजित होती है, अभाज्य संख्या कहलाती है। जैसे 2 , 3 , 5 , 7 इत्यादि। 

सह अभाज्य संख्या 

गणित की वह संख्या सह अभाज्य की श्रेणी में आयेगी जिस संख्या का म. स . 1 हो अर्थात 1 के अलावा कोई भी उभयनिष्ठ गुणनखण्ड न हो, जैसे : ( 2 , 3 ) , ( 3 , 4 ) , ( 5 , 9 ) , ( 13 , 15 ) , ( 15 , 16 ) आदि।

पूर्ववर्ती संख्या 

ऐसी संख्या जिसमें से 1 घटा कर पीछे जो संख्या बचती है वह पूर्ववर्ती संख्या कहलाती है। जैसे 1016 – 1 , इसमें से 1015 पीछे बचती है, 1015 पूर्ववर्ती संख्या कहलाती है।

परवर्ती संख्या 

गणित की ऐसी संख्या जिस संख्या में 1 जोड कर बताया गया हो, परवर्ती संख्या कहलाती है। जैसे 1221 + 1 = 1222 , 1222 परवर्ती संख्या कहलाती है। 

निष्कर्ष

यहाँ हमने प्राकृत संख्या क्या है एवं इसके साथ ही गणित के सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। अगर शब्द से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारा यह मेहनत भरा लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करेंगे।

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