स्वर – परिभाषा, भेद, प्रकार, उदाहरण

आज हम इस लेख में जानेंगे की स्वर किसे कहते है एवं इसके प्रकार कितने है। स्वर का सामान्य भाषा में बात करे तो इसका अर्थ ऐसे शब्दों से जो बिना किसी अन्य वर्णो की सहायता से उच्चारण किये जाते है। स्वर वो होते है जो स्वतंत्र रूप से बोले जाते है।   

हमारे पढने व लिखने के अनुसार तो स्वर एक ही होते है लेकिन व्याकरण के अनुसार स्वर को कई अनेक भागों में बांटा गया है। इसलिए हमें स्वर क्या है इसे समझना चाहिए। आज का हमारा यह लेख आपको इस के बारे में अच्छे से समझायेगा की स्वर क्या है एवं इसके कितने प्रकार होते है। 

स्वर क्या है एवं इसके प्रकार के बारे में इस लेख में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे। हम उम्मीद करते है की आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा। जब हम बचपन में स्कूल में पढते थे तब से ही व्याकरण के बारे में पढते आ रहे है। 

इसके बावजूद भी ऐसे कई बिंदु है जो हमें स्वर व व्याकरण के संदर्भ में समझ नही आते है। हमारे इसी लेख में उन्ही बिन्दुओं को समझाने का प्रयास कर रहे है। चलिये जानते है की स्वर क्या है और इसके कितने प्रकार है –

स्वर की परिभाषा

हिंदी व्याकरण के वे शब्द जो बिना किसी सहायता से उच्चारित किये जाते है। हिंदी व्याकरण के वे शब्द जो एकदम स्वतंत्र रूप से बोले जाते है, स्वर कहलाते है। 

हिन्दी के कुल स्वर 

हिन्दी भाषा में देखें तो हिंदी व्याकरण में कुल 11 स्वर है जो हिंदी भाषा में अपना स्वतंत्र स्थान रखते है। यह स्वर पूर्ण रूप से स्वतंत्र पढे जाते है। हिंदी के यह स्वर निम्न है 

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ऋ, ओ, औ

ध्वनि के अनुसार हिंदी व्याकरण में 13 स्वरों का वर्णन किया जाता है। 

स्वर के भेद

हिन्दी व्याकरण में स्वर को 3 भागों में बांटा गया है – 

  1. ह्रस्व स्वर
  2. दीर्घ स्वर
  3. प्लुत स्वर
  • हस्व स्वर – स्वर की इस श्रेणी में उन स्वर को रखा जाता है जिसके उच्चारण के समय कम समय लगता है। हस्व स्वर के उच्चारण में कम समय लगता है जिसका पहला कारण है इन स्वरों की मात्रा। इन स्वर के उच्चारण का यह सबसे अहम कारण है। हिंदी व्याकरण में एक मात्रा वाले स्वर ह्रस्व गिने जाते है इस स्वरों के उदाहरण निम्न है – अ, इ, उ
  • दीर्घ स्वर – हिंदी व्याकरण के ऐसे स्वर जिनके उच्चारण में हस्व स्वर से ज्यादा समय लगता है उन स्वरों को दीर्घ स्वर कहा जाता है। हस्व स्वर में एक मात्रा होती है वही दीर्घ स्वर में दो मात्राएं होती है। स्वरों में दो मात्रा होने के कारण इस स्वरों के उच्चारण में सबसे ज्यादा समय लगता है इसी वजह से इन स्वरों को दीर्घ स्वर की श्रेणी में रखा जाता है। दीर्घ स्वर के उदाहरण – आ, ई, ऊ, इत्यादि।
  • प्लतु स्वर – स्वर के भेद की श्रेणी में वे स्वर आते है जिनके उच्चारण में ज्यादा समय लगता है। एक प्लतु स्वर के उच्चारण में हस्व स्वर से तीन गुना तक ज्यादा समय लगता है। वैसे तो प्लतु के ज्यादा उदाहरण स्वर में नही मिलते है पर इस का एक सबसे अच्छा उदाहरण है ‘‘ ओउम ’’। हिन्दी व्याकरण की बात करे तो इसमें तीन मात्रा वाले शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है परन्तु वैदिक संस्कृत में ऐसे शब्दों का उपयोग होता है जिसके प्लतु स्वर कहते है। 

इन सब के अलावा हिंदी वर्णमाला में एक और प्रकार का स्वर होता है जिसे संयुक्त स्वर की संज्ञा दी जाती है। 

संयुक्त स्वर 

संयुक्त स्वर की श्रेणी में उन स्वरों को रखा जाता है जो असमान स्वरों से मिलकर बनते है। इस प्रकार के स्वर के उदाहरण कुछ इस प्रकार है – अ / आ एवं ई / ई से मिलकर बनता है ए, 

मुंह के आकार के स्वर 

मुंह के आकार के आधार पर स्वर को निम्न भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है – 

  • विवृत 
  • अर्धविवृत 
  • संवृत 
  • अर्ध संवृत

होठों के आधार पर स्वर विभाजन

होठों की आकृति के आधार पर स्वर के तीन भेद है जो इस प्रकार है। 

  • वृत्ताकार स्वर
  • वृत्ताकार स्वर 
  • उदासीन स्वर 

निष्कर्ष

यहाँ हमने स्वर क्या है एवं उसके सभी प्रकारों की जानकारी दी है, अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। अगर शब्द से जुड़ा किसी भी तरह का प्रश्न है तो आप यहाँ कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उम्मीद है की आप हमारा यह मेहनत भरा लेख अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करेंगे।

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